MyPoems: ऐ मालिक!

ऐ मालिक!

ज्यादा नहीं,

बस इतना करम करना

आँखों में शरम रखना

हाथों में धरम रखना

अपनी मर्यादाऔं का ज़हन में अदब रखना

ऐ मालिक!

ज्यादा नहीं,

बस इतना करम करना

बढ़ते कदमों को पिछले से बेहतर रखना

अच्छाई ना छूटे, ज़रा नज़र रखना

किरदार ऐसा देना कि,

पर्दा गिर भी जाए चाहे, पर ,

देर कर बजती रहें तालियाँ, इज्जत एसी बनाए रखना।।

ऐ मालिक!

ज्यादा नहीं,

बस इतना करम करना।।

Editorial Team (Prerna ki Awaaz)

Hello Everyone, Thank you for being with Digital Magazine "Prerna ki Awaaz"... (An inspirational bilingual magazine for the unique journey of life of self-reliant & liberated world...) आत्मनिर्भर और मुक्त विश्व की अनूठी जीवन यात्रा के लिए एक प्रेरणादायक द्विभाषी पत्रिका... "प्रेरणा की आवाज़" के साथ बने रहने के लिए आपका हार्दिक आभार...

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