Blog,  Spiritual Mirror,  Tips & Tricks,  Vastu Shastra

Vastu Tips for Karwa Chauth 2020:

पहली बार रख रहीं हैं करवा चौथ व्रत तो, प्रस्तुत है पूजा की विधि और आवश्यक सामग्री की विस्तृत जानकारी।

#VastuCheck

भारतीय संस्कृति में करवा चौथ पर व्रत का बड़ा महत्व है। यह व्रत हर साल सुहागन स्त्रियाँ असीम प्रेम और श्रद्धा के साथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को अपने पति की लंबी आयु की कामना करते हुए निर्जला रखती हैं। वर्ष 2020 में करवा चौथ का यह पावन पर्व 4 नवंबर (बुधवार) को मनाया जाएगा। व्रत करने वाली सभी महिलाएं इस दिन पूरे सोलह श्रृंगार करके विधि-विधान से शिव कुटुंभ की पूजा करते हुए माँ पार्वती से उन्हीं की तरह अखंड सौभाग्यवती होने का वर मांगती हैं। इस लेख मैं आपको वास्तु शास्त्र के कुछ ऐसे टिप्स देने जा रही हूँ जिनके पालन से आप अपनी करवा चौथ की व्रत, पूजा और तपस्या का बरपूर लाभ उठा सकतीं हैं। 

वास्तु शास्त्र के अनुसार, ईशान कोण, यानी आपके घर का उत्तर पूर्व (NE) कोना पूजापाठ के लिए सबसे उत्तम स्थान माना जाता है। यह वह स्थान है जहाँ वस्तु पुरुष का मस्तक है और जो की भगवान शिव का स्थान भी है। करवा चौथ की इस पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती के अलावा इनके पुत्र गणेश जी एवं कर्तिके जी की उपस्थित भी बहुत महत्व रखती है। माना जाता है की इस अलौकिक कुटुंब के दर्शन करके महिलाएं ईश्वर से इन्हीं के समान उत्तम एवं आदर्श पारिवारिक जीवन की कामना करती हैं। इसलिए करवा चौथ की पूजा के लिए उत्तर पूर्व दिशा का चयन करना उचित होता है। 

कलश सजाने से आता है मंगल: करवा चौथा की विशेष पूजा के लिए कलश सजाने का भी बहुत महत्व है और यह इस दिन की शोभा को और भी बढ़ा देते हैं। वास्तु के अनुसार पानी से भरा कलश घर में सुख, समृधि, आनंद, प्रेम, सामंजस्य और संतुलन का प्रतिक है जो कि एक संपूर्ण परिवारिक जीवन के लिए आवश्यक है।

कलश सजाने की विधि: नए मिट्टी के कलश ले कर उसे अच्छी तरह धो कर साफ़ पानी से भर लीजिये, अब इस कलश को अपने सामने रख कर उसके गले को लाल मोली बांध कर सजायें, फिर लाल रोली से कलश के बीच स्वस्तिक बनाए (स्वस्तिक बनाने के लिए सीधे हाथ की ring finger का प्रयोग करना शुभ एवं लाभकारी होता है।) अब पानी में 5/7 आम या अशोक के एक माप के ताज़े एवं साफ़ पानी से धुले हुए पत्ते सजाएं। एक ताज़ा पानी वाला पूरा नारियल भी मोली से बांध कर स्वस्तिक से पूजकर पत्तों के मध्य खड़ा रख दीजिये और इस कलश को पूजा स्थान में रखें। इस तरह सजे दो और कलश जिनमें नारियल के स्थान पर गेंदे के फूल (गेंदे के फूल परिवार के एक मत और एक साथ होने का प्रतिक होते हैं) भी लगा सकते हैं को अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर रखें। ऐसा करने से आप अपने घर में माँ लक्ष्मी का अभिनंदान करतीं हैं।

करवा चौथ व्रत पूजा में प्रयोग होने वाली सामग्री:

पूजा की थाली: करवा चौथ व्रत में पूजा कि थाली का विशेष स्थान है। यह वह थाली है जिसे कथा सुनते समय सुहागन स्त्रियाँ आपस में बदलते हुए कथा का आनंद और आपस में सहयोग के भाव को दर्शायेंगी। बाद में यही थाली चंद्र पूजन के समय भी काम आयेगी। इसमें सिंदूर, अक्षत्, जल का लोटा, सबुत सुपारी, पान का पत्ता, 2 लौंग, 2 हरि इलाईची, पुष्प, मीठी व नमकीन मठ्ठि और सूखे मेवे रखे जाते हैं। इसके साथ सुंदर सजी चलनी और मिट्टी के प्रज्वलित दीए भी पूजा की थाली को न केवल संपूर्णता देते हैं बल्कि बेहद खूबसूरत भी लगते हैं।

पूजा का आसन: एक बड़े मिट्टी के दिये में घी की ज्योत लगाइये जो शाम के पूजन, कथा आदि से रात्रि के चंद्र पूजन तक प्रज्वालित रहे। वास्तु के अनुसार खुश्बुदार अगरबत्ती और आरती के लिए कपूर रखने से नकारात्मकता दूर करने में सहायता मिलती है।

गणेश जी की पूजा एवं कथा: प्रथम पूज्य श्री गणेश जी महाराज का दूब (हरी देसी घाँस), लाल पुष्प (गुढल अथवा लाल गुलाब) और मावे के मिष्ठन और असीम प्रेम एवं श्रद्धा के साथ पूजन करके, कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। 

भगवान शिव के पूजन के लिए: चंदन, शहद, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, गंगाजल, अक्षत (चावल) आदि से भगवान शिव का विधिवत पूजन करना चाहिए। 

माँ गौरी के पूजन के लिए, सुहाग सामग्री: सिंदूर, मेहंदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ आईना, काजल आदि माँ गौरी को अर्पण कर सदेव इनका प्रयोग करते रहने की कामना करने के बाद इन सामानों को पुजरिन को दान देने योग्य रखना चाहिए। 

मिट्टी का टोंटीदार करवे: 2 मिट्टी का टोंटीदार करवे ढक्कन के साथ लीजिये, पहले करवे में दूध और पानी को बराबर मात्रा में मिला कर अर्क के लिए रखें और दूसरे करवे में सबसे पहले गेहूं या चावल उस पर एक चुटकी हल्दी, मीठी व नमकीन मठ्ठि, मिठाई और सूखे मेवे के साथ हलुआ और दक्षिणा (दान) के लिए पैसे आदि भी रखें। 

करवा चौथ की विशेष कथा: करवा चौथ का व्रत एक पौराणिक कथा को सुनने का रिवाज़ है। इस कथा को घर कि वृद्ध महिला अथवा पुजरिन या इंटरनेट के माध्यम से सुन सकते हैं। कथा सुनते समय बाएँ हाथ में कुछ हल्दी में लिपटे चावल के दाने रखें और कथा के बीच हुन्कारा भरते रहें।

मंत्र और आरती: किसी भी पर्व की सबसे अहम् चीज उस पर्व से संबंधित आराध्य की आराधना होती है। इसलिए जितना अधिक हो सके उतना ईश्वर का नाम जपना चाहिए। बहुत कठिन भक्ति न भी कर सकें तब भी आप सारा दिन इन आसान मंत्रों का जाप कर सकतीं हैं- ॐ नम: शिवाय, ॐ श्री गणेशाय नम:, जय माँ गौरी आदि। शाम के पूजन के बाद आरती जरूर गायें जैसे गणेश जी की आरती, शिव जी की आरती, माँ गौरी की आरती आदि। आरती करते समय चेहरे पर बहुत खुशी का भाव रखिये और पूर्ण उल्लास के साथ मन में प्रेम, श्रद्धा एवं धन्यवाद का स्वच्छ भाव रखना बहुत जरूरी है। 

ऐसा बिल्कुल ना करें: व्रत के दौरान भूख से हो रही परेशानी की चर्चा नहीं करनी चाहिए। यह एक प्रकार की तपस्या है, अत: इस तरह के विलाप से सारे दिन की मेहनत और व्रत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। काले और सफेद रंग का प्रयोग बिल्कुल ना करें। किसी भी प्रकार का अपशब्द, चुगली या मन में कोई भी द्वेष बिल्कुल ना रखें। 

सूर्योदय से पहले खा लेनी चाहिए सरगी- भारत के अधिकतम प्रांतों में सरगी का चलन नहीं है। पर पंजाब और उसके आस पास के स्थानों में इसकी बड़ी मान्यता है। सरगी सास बहू को देती है जिसमें मीठी व नमकीन मठ्ठि, मिठाई और सूखे मेवे के साथ सुहाग की निशानियाँ होती हैं। करवा चौथ कि सुबह सूर्योदय से पहले ही सास अपनी बहु को अपने हाथों से भोजन परोसती हैं, बहु को भी यह सरगी सूर्योदय से पहले ही खा लेनी चाहिए। सरगी खाने से पहले ही स्नान अवश्य करले और अपने पूजा स्थान पर जाकर माँ गौरी से आज के व्रत की मंगलकामना एवं निर्विघ्न संपूर्णता की प्रार्थना जरूर करनी चाहिए। सरगी खाते समय दक्षिण दिशा की ओर मुंह करना शुभ रहता है।

करवा चौथ में चंद्रमा की पूजा का महत्व- शास्त्रों में चंद्रमा को आयु, सुख और शांति का कारक माना जाता है। मान्यता है कि चंद्रमा की पूजा से वैवाहिक जीवन सुखी होती है और पति की आयु लंबी होती है।

इस दृष्टिकोण से इस वर्ष करवाचौथ का व्रत और पूजन और भी विशेष है, क्योंकि इस बार करीब सात दशकों बाद ऐसा योग बन रहा है जिसमें रोहिणी नक्षत्र और मंगल का योग एक साथ आ रहा है। करवाचौथ पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग होना अपने आप में एक अद्भुत योग है। यह योग चंद्रमा को अपनी 27 पत्नियों में सबसे प्रिय पत्नी रोहिणी के साथ होने से बन रहा है। पति के लिए व्रत रखने वाली सुहागिनों के लिए यह बेहद फलदायी साबित होगा। इससे करवा चौथ व्रत करने वाली महिलाओं को पूजन का फल हजारों गुना अधिक मिल सकेगा। 

पति अपनी पत्नियों को इस पावन पर्व पर स्वेच्छा से कोई तोहफा ज़रूर दे, और वास्तु के हिसाब से आपसी प्रेम के दो हंसों या युवा हिरणों का जोड़ा अवश्य दे। इस सुंदर तोहफे को बाद में अपने बेडरूम में ऐसी जगह लगाएं जहाँ आप दोनों कि नज़र आसानी से उस पर पड़ सकें। 

करवा चौथ 2020 के लिए शुभ मुहूर्त- ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करवा चौथ 2020 के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:

  • काशी में या आसपास में चंद्रोदय समय रात में लगभग 7:57 बजे होगा।
  • 4 नवंबर को शाम 05 बजकर 34 मिनट से शाम 06 बजकर 52 मिनट तक करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त है।
  • करवा चौथ के दिन इस बार चंद्रोदय रात 8 बजकर 16 मिनट पर होगा, जिसमें आप चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना करवा चौथ का व्रत पूर्ण कर सकती हैं।
  • पंचांग के अनुसार इस दिन चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 4 नवंबर 2020 की सुबह 4 बजकर 24 मिनट पर होगा और चतुर्थी तिथि की समाप्ति अगले दिन 5 नवंबर 2020 को सुबह 6 बजकर 14 मिनट पर होगी।

करवा चौथ का यह पावन पर्व अपने जीवनसाथी के प्रति आपके समर्पण, प्रेम, त्याग और तपस्या का प्रतीक है। इसे पत्नियाँ या स्त्रियाँ ही मात्र इसलिए करती हैं क्योंकि स्त्रियों की सहनशक्ति पुरषों की अपेक्षा अधिक होती है। परंतु प्रेम भाव से यदि पति भी अपनी पत्नी के साथ व्रत करना चाहे तो इससे सुंदर और भला क्या हो सकता है। आप सभी को मेरी ओर से करवा चौथ की ढेरों शुभकामनाएं।। 

Hello Readers, I’m a mommy blogger, I like to write on a wide range of topics. I'm an intense writer and a vigorous blogger. I write ideological scripts in the form of Poems, Short Stories etc with feel & purpose. Venture: SHE INSPIRES or प्रेरणा is a magazine where we women encourage each other and help to proceed further towards her dreams and happiness. That's all for now.. Hope you enjoy reading here in pearlsofwords.com Regards Author

3 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *