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A Best Hindi Story by Sunita Mishra

ई-पत्रिका हर स्त्री एक “प्रेरणा” द्वारा संचालित Facebook Group, Writer’s Club में साप्ताहिक काव्य / कहानी लेखन प्रतियोगिता मिति 7/06 /2021 से 12 /06 /2021 में भोपाल मध्य प्रदेश की श्रीमती सुनीता मिश्रा जी की उल्लेखनीय प्रस्तुति को हमारी वेबसाइट पर Featured Post के रूप में प्रकाशित किया जाता है। सुनीता जी आपको अनेक शुभकामनाएं एवं बधाई।

द्वारा – सुनीता मिश्रा (भोपाल)
विषय-जगमगाते शहर की अंधरी ये कहानियाँ।
विधि -कहानी
शीर्षक-काले धब्बे

क्या जानना चाहते है आप,मुझसे।?

उस जगमगाते शहर के बारे मे,वहाँ रात की रोशनी मे आप सुई ढूंढना चाहते है?आइये–

तो मिलवा ही देते है उस शहर से आपको ,जहाँ दूध सी

रोशनी में नज़र आयेंगे काले धब्बे भी——–

“उठ बे!तेरे बाप की बैंच है।सोया पड़ा है आराम से”पुलिस वाले ने अपना डंडा फटकारा।
“माई बाप !रात मे कहाँ जाऊँ।सो जाने दो।”
“ठीक है ,आज सो ले।”कहते हुए पुलिस वाले ने उसके दिये नोट को जेब मे डाल लिया।
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“चोट कैसे लगी रे छोकरी तेरे को”
“बंबे की लाइन में गंगु बाई मेरे पीछे थी,फिर भी उसने मेरी बाल्टी हटा के अपनी बाल्टी बंबे के नीचे रखी।तो मैने उसकी बाल्टी के ऊपर अपनी बाल्टी लगा दी।मारा उसने।”
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“माँ ,रोज रात को बापू सराब पी के आता,मारता तेरे को।तू उसको कुछ बोलती क्यों नई ?”

“कितनी बार बोला बाबू तेरे को,जल्दी आने का।अबी दूसरे गिराहक का टैम होने वाला।चल जल्दी निपट।”
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“कैसे जानेगा मुन्ना कि तुम उसके पापा हो,सुबह उसके जागने से पहिले तुम काम पर निकल जाते हो,और जब तुम लौटते हो वो सो चुका होता है।”
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“यार हम कैसे पति पत्नी है।साथ बैठने का समय ही नहीं हम दोनों के पास।रात जब तक मैं अपने ऑफिस से घर लौटता हूँ,तुम्हारे कॉल सेन्टर जाने का समय हो जाता है”
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“इतना बड़ा बिजनेस ऐसे ही नहीं खड़ा किया मैने।खून पसीना बहाना पड़ता है।ये बंगला,गाडियाँ,मँहगे स्कूलों मे पढ़ रहे हमारे बच्चे ।तुम कहती हो तुम और बच्चों के लिये समय निकालूँ ।– काम छोड़ दूँ अपना।ये सम्भव नहीं । अरे साड़ियाँ,गहने खरीदने के लिये मुझ्से पैसे माँग लो,पर मेरा समय मत मांगों।
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“आई! कित्ती रात कर दी।”
“क्या करती,मेम साब,और साहेब पार्टी से देर से लौटे।बेबी को छोड़ कर कैसे आती।”
“मैं भी तो खोली मे अकेली थी आई ।”
“अरे बापू नई आया तेरा?”
“थोड़ी देर पहिले आया।”
उसने देखा उसका मरद खोली के कोने मे खुर्राटे मार रहा और बगल मे बोतल औंधी पड़ी है।

अब तो जान लिया न आपने, -जगमगाते शहर की ये अंधरी कहानियाँ है।

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