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Weekly Vastu Tips in Hindi: Part- 1 Five Elements

अक्सर यह देखा गया है कि, लोगों को वास्तु शास्त्र के मूल को समझने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिसके चलते वे इस अति आवश्यक विषय को अंधविश्वास या कल्पनिक आदि कुछ मान कर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इन सब बातों को देखते हुए ही मैने साप्ताहिक (weekly)  वास्तु टिप्स पोस्ट करने का निर्णय लिया है।जिससे सभी को वास्तु के विषय में पर्याप्त जानकारी मिल सकेगी और वे अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान स्वयं ही कर सकेंगे। 

ध्यान रखिये, हमें वास्तु शास्त्र के सदुपयोग से अपने स्थान की शक्तियों का सकारात्मक संतुलन स्थापित कर जीवन की अनेक परेशानियों को दूर करने की ओर अग्रसर होना है। इसी कड़ी में आज का विषय…. 

पंचमहाभूत या प्रकृति के पाँच तत्व (Five Elements)

जल (water), वायु (air), अग्नि (fire), पृथ्वी (earth) और आकाश (sky)

इस सृष्टि की रचना इन पंचमहाभूतों से मिल कर हुई है। यहाँ तक की हमारा शरीर भी इन्हीं पाँच तत्वों से मिल कर बना है और जीवन चक्र समाप्त होने पर भी हम इन्हीं पाँच तत्वों में जा कर मिल जाते हैं। 

वास्तु का प्रयोजन भवन में निर्मित वातावरण के जरिए मानवीय क्षमता की बेहतरीन संभावनाओं को जाग्रत करना है। वास्तु शास्त्र के संदर्भ में भी इन पंचमहाभूतों अथवा पाँच तत्वों का ख़ास महत्व है। 

दूसरे शब्दों में किसी भवन का वास्तु अध्यन् करने का अर्थ है उस भवन की विभिन्न दिशाओं में कौनसा तत्व प्रधान है, किस तत्व के अभाव से वास्तु दोष उत्पन्न हो रहा है, तथा मौजूदा स्थिति में किस तरह इन्हीं तत्वों में संतुलन से वास्तु समाधान स्थापित होना चाहिए। 

यह सब ज्ञान हमें वास्तु विज्ञान के मध्यम से मिलता है। 

उत्तर पुर्व – ईशान में …जल , 

दक्षिण पुर्व -अग्निकोण में …अग्नि ,

उत्तर पश्चिम – वायव्य में …वायु 

दक्षिण पश्चिम – नैऋत्य में …पृथ्वी 

और मध्य में …आकाश 

तत्व की स्थापना होना चाहिए।

अगर आप भी अपने घर अथवा कार्यस्थल के वास्तु को समझने, संभालने और सही परिवर्तन कर वास्तु दोष दूर करने के विभिन्न उपायों आदि की जानकारी के लिए संपर्क करना चाहते हैं तो…
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