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The Women That I Am

Hindi Poems and conversation: “Ghutan”

मां
रिश्तों के तो नाम कई हैं, पर मां होना आसान नहीं है।
अपना हर एक ख्वाब भुलाकर, खुश रहना आसान नहीं है।
एक एक काम है मां के जिम्मे, समय सारणी सख्त बड़ी है,
पल पल काम में उलझे रहना, सच जानो आसान नहीं है।
माना ये एहसान नहीं है, किसी पर इल्जाम नहीं है,
पर अंतर्मन की अभिलाषा को,भुला पाना आसान नहीं है।
घर छोड़ो तो घर बिगड़ेगा, मन तोड़ो तो मन बिगड़ेगा,
दोनों को समेट के चलना, ये भी तो आसान नहीं है।
सबसे कठिन तो तब लगता है,जब कोई नहीं समझ पाया ये,
कि कैसे मां ने पूरी की है, हर रिश्ते की जिम्मेदारी।
कर कर के भी नाम ना मिलना, हक का वो सम्मान ना मिलना,
हंसकर सब कुछ टालते रहना,
बिलकुल भी आसान नहीं है।।
घर की धूल
चमकती धूप में जब कभी देखा अपनी हथेली को, कम नहीं पाया किसी से भी इन लकीरों को,
कुछ कमी तो रह गई फिर भी नसीब में मेरे, ठोकरें खाता रहा मन हर कदम तकदीर से,
हर सुबह लाती है मुझ में इक नया सा होंसला, हिम्मते उठती है लेने को कोई फैसला…
ये भी कर लूं, वो भी कर लूं, जी लु अपने आपमें, कोई मजबूरी या बंधन रोके ना अब राह में,
साथ चढ़ते सूर्य के फर्ज भी बढ़ता गया, जिम्मेदारियों की लय में दिन भी ढलता गया।
मैं मेरे सपनों के भीतर यूं ही उलझी रही, शाम आते ही अरमानों का रंग भी उड़ गया,
बहुत कड़वा है यह अनुभव सोच और सच्चाई का, दोष किसका है यहां पर केवल अपने आप का…
क्यों यह सोचा कोई आकर मेरे लिए सब लाएगा? क्यों न सोचा मैं ही उठ कर खुद ही सब कर पाऊंगी?
कर रही हूं हद से बढ़ कर मूल्य जिसका कुछ नहीं, मूल्य क्या कोई भरेगा जो भी है अनमोल है…
फिर भी लोगों की नजर में ग्रहणी घर की धूल है, फिर भी लोगों की नजर में ग्रहणी घर की धूल है….

आज मीनल की कविताओं का पोस्ट देखते ही नैना ने मीनल को विडियो कॉल किया। मीनल अभी दोपहर के खाने के सभी काम समेट कर शाम कि चाय का प्याला लेकर बैठी ही थी। नैना का कॉल देखते ही मुस्कुराते हुए कॉल उठाया और बोली: “हां जी मैडम कैसी हैं आप? “

(नैना और मीनल बचपन की सहेलियां हैं शादी के बाद नैना बेंगलुरु में और मीनल चंडीगढ़ में रहने लगे। दोनों सहेलियों में इतना प्रेम है कि वे अपने दिल की हर बात एक दूसरे के साथ निसंकोच बांट लिया करती हैं।)

नैना : अभी तुम्हारी कविता पढ़ी, बहुत खूब लिखा है यार। एक एक शब्द से दर्द का एहसास हो रहा है। 

वैसे फिर कुछ हुआ है क्या?

मीनल: नहीं कुछ खास नहीं, बस अब थक चुकी हूं मैं अपना आप दे देकर, मानो हार सी गई हूं। 

नैना : यह भी क्या अजीब प्रथा है समाज की वैसे, कि जहां एक तरफ लड़की कल तक अपने माता-पिता के घर में नज़ाकत से अपना जीवन व्यतीत कर रही होती है वहीं  अचानक शादी होते ही सर से पाँव तक अनगिनत जिम्मेदारियों से घिर जाती है।

 यह भी भला कोई बात हुई।

मीनल : जमाना चाहे कितना भी स्त्री और पुरुष की समानता के गीत गाता रहे, पर वास्तव में समाज इस बात को अब तक भी मन से स्वीकार नहीं कर सका है।

नैना:  समाज की यही दोगली विचारधारा ही तो नारी के जीवन की सबसे बड़ी विडंबना है।

मीनल : पता है, पहले के दौर में महिलाएं इतना सब कैसे संभाल पाती थी? क्योंकि तब कम उम्र में ही विवाह हो जाया करते थे, तब औरत की अपनी स्वतंत्र सोच तैयार होने से पहले ही उसे गृहस्थी की पशंपेश में धकेल दिया जाता था।

नैना : हां यार, इसलिए ही वह जीवन के अंत तक परिवार द्वारा दी गई जीवन शैली को ही अपना अस्तित्व बनाकर जीती रहती थी।

पर आज, आज बात कुछ और है। नारी उच्च शिक्षित होकर अपनी पसंद और नापसंद के दायरों को तैयार करके पूर्णतया मानसिक तौर पर परिपक्व हो जाने के बाद ही विवाह करती है। ऐसे में उसकी सोच को किसी भी तरह से दबोच कर रख पाना असंभव है।

मीनल : हम अपने पैरों पर खड़े होना चाहती हैं, अपने निर्णय स्वयं लेने में स्वतंत्र है तो बात बात पर परमिशन माँगना अच्छा नहीं लगता।

नैना : अच्छा बोल ना क्या बात है, आज तेरा चेहरा भी उतरा हुआ है।

मीनल: कुछ नया हो तो बोलूं, वही यार नैना, मैं साल दर साल अपना समय बर्बाद होता महसूस कर रही हूं। जब तक चुपचाप सबके हिसाब से चलते रहो तब तक सब ठीक ही चलता रहता है।

मैं अपने दम पर कुछ काम करना चाहती हूं, नाम और पैसा कामना चाहती हूं। मुझे समझ नहीं आता इसमें बुराई क्या है?

हैरानी की बात तो यह है कि यदि मैं कुछ नहीं करती तो, यह कह कर अपमानित करते हैं कि, “तुम्हारा मुझे क्या फायदा है, मैं ही दिन रात मेहनत करके तुमको पाल रहा हूं। या फिर अपने दोस्तों रिश्तेदारों की कामकाजी महिलाओं के उदाहरण दे दे कर शर्मिंदा करते रहते हैं।   पर ज्यूं ही अपना काम करने कि बात रखो तभी, कभी जिम्मेदारियों के नाम पर तो कभी परिवार की ज़रूरतों की दुहाई देकर या तरह तरह के सामाजिक नियमों की बात करके चुप करवा दिया जाता है।

फिर भी अगर हिम्मत करके कोई कदम लेना चाहूं तो अंतिम हथियार के रूप में अपमान भरे शब्दों से मानसिक प्रताड़ना देने लगते हैं, और यही सबसे ज्यादा तकलीफ़ वाली चीज़ है।

नैना: हम्ममम…. पर ये दोहरा व्यवहार क्यों?

मीनल: क्योंकि मैं अपनी रुचि के अनुसार वह काम करना चाहती हूं जिससे मैं घर के सारे काम करने के बाद बचे समय का उपयोग कर सकूं। पर इसमें कमाई काम होगी और उनका मानना है कि छोटिमोटी राशि के लिए घर की नज़रअंदाज़ करने की कोई जरूरत नहीं।

नैना: सबसे अजीब तो यह ही है कि, अपने अंदर की insecurity को लोग अपशब्दों द्वारा क्यों जताते हैं। हमारे घर तो गली का प्रयोग भी बड़े आराम से किया जाता है। कभी कभी तो पलट कर वहीं शब्द बोलने का मन करता है, कि सुनो और सुन कर देखो कैसा महसूस होता है।  मेरी भी तो ऐसी ही कहानी है और मैं तो अच्छी नौकरी भी करती हूं। पर मुझे यह सुनने को मिलता है कि मुझे मेरे पैसे का गुरूर है। या मैं घर के कामों में ध्यान नहीं देती। 

शब्दों के तीर सीधा मन को छलनी का देते हैं।

मीनल: ज्यादातर महिलाओं के साथ ऐसा होता है, हम कोई विशेष तो नहीं किसी के साथ कुछ तो किसी के साथ कुछ।

नैना: शारीरिक प्रताड़ना तो दिख जाती है पर इस मानसिक शोषण का क्या, जो हमें जीते जी ही मार देता है। अपनों के बीच में रहते हुए भी एक अनचाहा सा अकेलापन और ख़ालीपन सा महसूस होता है अपने ही परिवार में सोच सोच के बात करने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

मीनल: बात केवल मात्र इतनी है कि, यूं तो हर किसी को ही अपनी जगह से अपनी जिम्मदारियों को पूरा करना होता है, और हम सभी अपने काम और उससे जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए भी हम तत पर भी हैं। पर अपनों से मिले प्रोत्साहन एवं सहानुभूति से हर काम आसान हो जाता है।जैसे भरी गर्मी में रसोई घर में घंटों लगा कर बनाए गए पकवानों को जब सब लोग शौक से खाते हुए कुछ तारीफ के जुमले बोल देते हैं, तो मानो सारी मेहनत सफल हो जाती है। वहीं यदि कोई खाना खाकर यह कह कर उठ जाए कि, “रोज-रोज बोलना क्या है, यह तो तुम्हारी ड्यूटी है”….

इस तरह के बोल हिम्मत ही तोड़ देते हैं।

नैना: ड्यूटी?? हा हा हा हा हा हा……..

विवाह के दौरान मैरिज रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ किसी बांड पर भी हस्ताक्षर करवाए थे क्या कि आज रानी महारानी बनकर फोटो खींचवाओ और कल से ही घर के सारे super woman की तरह संभाल लो।

(दोनों ज़ोर से हँसने लगी।)

नैना: अच्छा सुन, कभी सोशल मीडिया पर अपने बाकी सहेलियों की तस्वीरों को जरा ध्यान से देखना, उन चमकते चेहरों के भीतर का दर्द केवल वही जानता है जो उस दर्द को वास्तव में सह रहा होता है।

और ये भी जरूरी नहीं कि हर बार शारीरिक चोट का ही दर्द हो कभी-कभी अपनी इच्छाओं को मार मार कर जो घाव वह अपने भीतर बना चुकी होती हैं वह समय के साथ-साथ नासूर बनकर सताते हैं।

मीनल: कभी सोचा है महिला दिवस, मातृत्व दिवस, महिलाओं के लिए नौकरियों में आरक्षण, सरकारी वाहनों में अलग से स्थान, विशेष पुलिस सहायता कार्यक्रम आदि की आवश्यकता भला क्यों है?

पुरष दिवस जैसा कुछ क्यों नहीं होता?

क्योंकि नारी की अध्य शक्ति के रूप में पूजा करने वाला यह समाज उसका अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ता और न ही किसी भी तरह से उसकी मर्जी से उसे जीने नहीं देना चाहता।

नैना: चलो! ज़रा यह सोच कर देखो कि मेकअप किट में कंसीलर की आवश्यकता क्यों होती है भला?

क्योंकि युवावस्था तक जो आंखें प्राकृतिक रूप से चमकती और बतियाती थीं, उन्हीं आंखों के चारों ओर आज जो तनाव और अनिद्रा से उभरे काले घेरे हैं, उन्हें तो कंसीलर ही तो छिपाएगा ना।

हा हा हा हा हा हा……..

(दोनों सहेलियाँ व्यंग्यात्मक रूप से हंस पड़ी)

मीनल: मेकअप की आड़ में अपनी डेंटिंग पेंटिंग करके, महंगी साड़ी और कीमती गहनों से सजाकर घर की लक्ष्मी को फिर किसी समारोह की रौनक बनने को तैयार भी तो होना होता है।

हा हा हा हा हा हा……..

(दोनों फिर एक बार खिलखिला कर हंस पड़ी और अपनी हंसी के माध्यम से एक-दूसरे को सहर्ष संघर्ष करने की प्रेरणा देती रही।)

ऐसा नहीं है कि जीवन में कोई सुखी नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि हमारे दांपत्य जीवन में प्रेम नहीं है, पर सबसे बड़ी बात यह है कि प्रेम और भावनाओं की आड़ में हमारे स्वाभिमान का निरादर नहीं होना चाहिए क्योंकि हर व्यक्ति को अपने अनुसार जीने का पूर्ण अधिकार है और हर किसी को अपने लिए कुछ स्थान ज़रूर मिलना चाहिए।

हमें परिवार, रिश्ते नाते और यहां तक कि दोस्तों की भी आवश्यकता है ही, पर इसका मतलब यह तो नहीं कि हम अपनी निजी जिंदगी को पूरी तरह समर्पित करने के बावजूद भी अपमान के हक़दार हैं। और वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि हम हर तरह से पुरुष के बराबर होने के बावजूद भी सामाजिक मापदंडों में पुरुष से कमतर मानी जाती हैं।

इन सब भेदभाव और दुनिया भर के उतार-चढ़ाव के बावजूद अगर कोई चीज है जिसके दम पर महिलाएं हर कष्ट सहने के बावजूद मुस्कुरा कर फिर हर खुशी का अभिनंदन करती हैं वह है उनका अपना आत्म बल, स्वाभिमान और आत्मविश्वास। इस बात को मैंने अपनी कुछ पंक्तियों द्वारा सजाने की कोशिश की है,

 *तुम बिन*

मैं जी नहीं पाऊंगी तुम बिन 
हां जी नहीं पाऊंगी तुम बिन।

चाहे रिश्ते हजार मिल जाए,
पर साथ ना कोई भी तुम बिन,

चाहे नाम अनेकों पड़ जाऐं,
पहचान नहीं मेरी तुम बिन,

चाहे काम पहाड़ से बढ़ जाऐं,
पर शक्ति नहीं होती तुम बिन,

चाहे वक्त बहुत कम रह जाए,
पर मूल्य नहीं मेरा तुम बिन।।

यह तय है, मेरा अनुभव है, 
मैं जी नहीं पाऊंगी तुम बिन...
तुम! 
कौन हो तुम ?

तुम मेरी हस्ती का कारण हो,
तुम मेरा स्वाभिमान भी हो।

तुम मेरे अंदर दहक रही,
प्रकाश पुंज की ज्वाला हो।

मैं नारी हूं और और शक्ति भी,
तुम मेरा आत्म संभल हो..

तुम मेरा संयम कोष भी हो, 
और ममता की नौ निधि धारा भी..

 तभी....

चाहे कोई साथ ना रह पाए, 
पर साथ मेरे तुम हो हर क्षण।

चाहे युद्ध अनेक हों जीवन में,
पर स्नेह  तुम्हीं से है हर क्षण।

चाहे कोई पुकार न सुन पाए, 
तुम सुनते रहते हो हर क्षण।

चाहे मन न कहीं भी बहल पाए,
दिल को समझाते तुम हर क्षण।

तो ये तय है, मैंने देखा है, 
मैं जी नहीं पाऊंगी तुम बिन 
मैं जी नहीं पाऊंगी तुम बिन...

Hello Readers, I’m a mommy blogger, I like to write on a wide range of topics. I'm an intense writer and a vigorous blogger. I write ideological scripts in the form of Poems, Short Stories etc with feel & purpose. Venture: SHE INSPIRES or प्रेरणा is a magazine where we women encourage each other and help to proceed further towards her dreams and happiness. That's all for now.. Hope you enjoy reading here in pearlsofwords.com Regards Author

86 Comments

  • Deepika Sharma

    I was totally blown off reading your post. You’ve written not one but 3 poems and all of them touched my heart. Tum bin had me in tears. The conversation between friends was an amazing way to highlight the problem many of us face daily. Loved your post.
    Deepika Sharma

  • Shail Thosani

    Wow!! Such a honest post. You have written a poem, a dialog sequence and a song all in one. I loved your poem. Being a mother is indeed difficult but I feel being a mother is the best gift universe has given a woman. To be able to create a life and then be such an integral part of it is a blessing only given to us women.

  • Harshita Dawar

    Ramandeep
    Minal Ur naina की बातों में लगा रमन और हर्षिता की बात चीत पन्नों पर उतार दी ।
    बेहद करीब से जान पाती हूं रमन
    हम बहने तो नहीं पर बहुत एहसास जगा देती है
    हमारी खामोशियों में खुद को हूं पहचान देती है
    बहुत मुश्किल होता है ख़ुद को तराशना
    हमेशा साथ ही मै तुम्हारे खुश रहो
    कड़वी सच्चाई दुनियां की बातों को तावजुव ना देना हो सके तो ख़ुद को ख़ुद ने पूरा मान लेना
    अकेला ना समझ कर ख़ुद को मुझ पर याकि कर लेना।
    खुश रहो

    • Author

      My dear Harshita Di,
      आपके स्नेह और सहारे के कारण ही मैं पुनः खड़ी हो पई हूं। इस पोस्ट के माध्यम से मैंने ये ही दर्शाने की कोशिश कि है कि माना कष्ट बहुत हैं जीवन में पर सखियों का साथ संघर्ष के कठिन समय को भी आसान बना देता है।
      ईश्वर आपको बहुत सी खुशियां दें। 😘

      • Harshita Dawar

        Raman my soul sister
        Duniya chahe kuch bhi kahe
        Duniya chahe kuch bhi samhje
        Bas ye yaad rakhna
        Hum kisi se kam nahi
        Bas ye yaki age badne me madad karega ga
        Di wishes and love always with you ❤️❤️

  • Novemberschild (Romila)

    Hi Raman
    Reading you for the first time through Bloghop
    I must say you have written a wonderful post, though it was lengthy I enjoyed reading it.
    I usually dont share blog posts in my friend’s circle, but this post is surely being shared.
    Thank you for writing this.

  • PraGun

    सच कहा है माँ होना आसान नहीं है
    अपनी इच्छा के आगे बच्चो और परिवार को रखना आसान नहींहै
    बिना किसी आशा या तारीफ की उम्मीद के बस अपनी जिम्मेदारी निभाना सच में आसान नहीं है

    कर रही हूं हद से बढ़ कर मूल्य जिसका कुछ नहीं, मूल्य क्या कोई भरेगा जो भी है अनमोल है…
    फिर भी लोगों की नजर में ग्रहणी घर की धूल है, फिर भी लोगों की नजर में ग्रहणी घर की धूल है….
    इन पंक्तियों ने मेरे आँखों में सच में आँसू ला दिए, बहुत ही दर्द से भरी हुयी कविता है.
    मीनल नैना की दोस्ती और बाते और तुम बिन कविता भी बहुत ही खूब है. जितनी तारीफ़ करे उतनी काम है

  • Deepika Mishra

    Wow! Kya likha hai. Har ek word bahut sare sawal karta hai jiska jawab saalo se nahi Mila hai. Aaj tak ka padha hua sabse behatarin post. Baato baato main aap jo Kah Gaye ho, aaj ki aurato ka dard bayan karta hai.

  • Jyoti Jha

    Beautiful words and lovely writeup! A mother’s never-ending and ever-evolving role is exquisitely presented through the poem. And a woman’s plight engagingly portrayed through the conversational setup.

  • Srivalli

    This is a powerful post that shows the double standards and hypocrisy of this society. The translator worked great in translating your lines into emotional, meaningful sentences in English. I love the initial poem.

  • Ritu

    Beautifully penned poems and conversation, Ramandeep. This is the hypocrisy women face. They are often berated for being stay-at-home moms, but questioned for attempting to follow their dreams. Not sure if this mentality will ever change.

  • Meena Chatty

    Women are doomed by the choices they make! Damned if you do and damned if you don’t! This vidambana (could not find an equivalent word for it in english) has come out so well in your post.

    Meena from balconysunrise.wordpress.com

    • Monika

      Beautifully written . The conversation between two friends and the deep heart feelings well expressed in poetic form.

  • Sangya Nagpal

    Hii Raman
    पढ़ते-पढ़ते ऐसे लग रहा था जैसे कोई मुझसे ही बात कर रहा है।सच में समाज की दोहरी मानसिकता देख कर मन दुखी हो जाता है।

  • Arushi Seth

    What a beautiful and honest post. The poetry and the dialogue between friends conveys a lot. It is the truth that we talk of equality but we are far away from that still. Hope we can bring about a change.

  • Ruchi Nasa

    Congratulations for writing such a meaningful post. The conversation between friends was so true , the Crux of all the crimes we woman face, the hypocrisy of the society. The poems were beautiful too. Sorry, should have replied you in Hindi but not so fluent anymore

    • Author

      Thank u so much dear Ruchi…
      English hindi is not an issue…
      The main thing is your precious time and attention which you have devoted to read and understand the actual feel of the words in the post…
      Thanks a lot
      best wishes to u

  • Surbhi

    Beautiful write-up ! A mother’s role is glorified to the extent that she can never be truthful if she is feeling low. Women are living up to hypocrisy each day. Well-penned!

    • Author

      Heartiest gratitude Janaki ji, your words is a source of encouragement to me….
      lots of love and best wishes for you….

  • Archana Srivastava

    Beautifully penned down the pain of a homemaker when all her efforts and sacrifices go unnoticed by her own partner, conversation style that you portrayed between two friends Naina and Meenal with the mix of pain and laughter, so real, your writing style is so unique with the mix of three different poems in the queue, I so loved it…..!

    Archana Srivastava

  • Priyanka Nair

    Behat umda post Raman, dil ke haar taar ko cheda. Bohat man se likha hai aapne aur hum sab tak apni baat pahuchayi jo ki ye blog padhne wali har womaniya sarahegi. Apni choices aur decisions se lekar apni chahto tak ka safar sab utar diya aapne is post mein, wonderful!

    • Author

      Thanks my dear Priyanka, you are an inspiration to me…
      your comment means a lot to me plz keep in touch & guide me accordingly…

    • Author

      yes sir, this is the only thing which suppress the power of woman….
      Thanks a lot for your supportive comment…

  • Neeraja Ganesh

    Don’t lower your standards for anyone or anything! Self respect is everything! Great that you brought it out via the story and the poem!

  • Namratha Varadharajan

    Being a mom and fulfilling the role of a mom is indeed difficult. Totally agree which you. Our mothers made it look easy but my journey seems to be littered with pebbles and stones. Loved your poems and dialogue. Beautiful post

  • Urvashi

    I am short of words and expressions. I am so inspired by your post. A simple conversation between two women can be so overwhelming and eye opener. Sometimes all we need is just a friend who can listen.

  • ارشفة المواقع

    Hi! I realize this is somewhat off-topic however I needed to ask.
    Does building a well-established website like yours require a lot of work?
    I’m completely new to writing a blog but I do write in my diary everyday.
    I’d like to start a blog so I can easily share my own experience and views online.
    Please let me know if you have any kind of ideas
    or tips for brand new aspiring blog owners. Thankyou!

  • Meera

    This reminds of this song,
    Nàari ka samman Kari,
    Math uska apnaan karo

    Well this happens everywhere
    Does it mean to say, we accept the insults thriught words and gestures
    We don’t, it’s our nature to forgive which pushes us beyond the bondary and run the show.

    Your words are deep and true..
    Thanks

  • Varsh

    I would like to say that no matter how small any work or the pay you get for it, it is earning and must be respected. Anything that gives you that joy is worth it.
    You’ve a beautiful way of expression. Enjoyed reading this.

  • Aishwarya Sandeep

    Such a beautiful post. Expressing every relationship in life especially motherhood. I think all the glorification is just so that in the name of sacrifice we can just exploit a woman even more. Why do we fail to understand that even mothers can have their own life.

  • Srishti Rajeev Menda

    The poem, the conversation are so real and have been put across in a fine manner. It touches us emotionally and also gives rise to a rebellious nature at the same time. Why must women go through all this?

  • Rashi Roy

    Hey Raman, reading you for the first time and I must say you have a very creative and imaginative writing skill. Loved the way you expressed your feelings through the poem and dialogues between friends. Keep writing always. Glad that you are a part of this blog hop 🙂

  • Manas Mukul

    Amazing write up Ramandeep ji. Please dont give up. this is really good hindi writing. All the poems and the exchange between Meenal and Naina are superb. Thanks for joining the hop and gracing us with this lovely piece.
    #RRxMM #TheWomanThatIAm

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