Between Us – Episode 003 Attention नहीं… Invitation.

Attention नहीं… Invitation.

रिमी: “अर्जुन… एक बात पूछूँ?”

रिमी: “मैं किसी के पीछे भाग नहीं पाती… अगर कोई थोड़ा-सा भी अनदेखा कर दे, तो मैं खुद ही पीछे हट जाती हूँ।”

अर्जुन ☕ “क्योंकि… तुम Attention माँगना नहीं जानती। तुम्हारा मन… Invitation का इंतज़ार करता है।”रिमी 🤔 “मतलब…?”

अर्जुन ❤️ “Attention कहता है—’मुझे देखो… मुझे सुनो…’लेकिन Invitation कहता है—’अगर मन हो… तो मेरे पास बैठ जाना।'”

💎 Pearl of Words

आज का मोतीजो लोग सम्मान के साथ जीते हैं, वे Attention नहीं माँगते…वे अपने व्यक्तित्व, अपने व्यवहार और अपने काम से Invitation देते हैं।

☕ Between Us Moments

रिमी 😊”शायद इसी वजह से अपने काम का बार-बार प्रचार करते हुए मुझे संकोच होता है…”

अर्जुन ☕”क्योंकि तुम अपने शब्द बेचना नहीं चाहती…तुम चाहती हो कोई उन्हें अपना समझकर पढ़े।”

रिमी 😌”अगर कोई न आए तो?”

अर्जुन 🌸”फूल खुशबू देने से पहले किसी का नाम नहीं पूछते…वे बस खिलते रहते हैं।”

रिमी 🤭”मतलब… हर बार सबको बुलाना ज़रूरी नहीं?”

अर्जुन 😄”नहीं…जो सही लोग होंगे, वे रास्ता ढूँढ़ ही लेंगे।”

रिमी ☺️”और जो कभी न आएँ?”

अर्जुन ❤️”उनके लिए दरवाज़ा खुला रहेगा…लेकिन उनके पीछे भागना नहीं।

“रिमी ❤️”अर्जुन…”

अर्जुन ☕”हूँ?”

रिमी 😊”आज समझ आया…मेरा काम… मेरे होने का प्रमाण है…Approval का नहीं।”

अर्जुन 🌿”बस… यही बात याद रखना।”🌿

The Between Us Way

❤️ अपनी बात कहो… गरिमा खोकर नहीं।

❤️ अपने काम को दुनिया के सामने रखो… साबित करने के लिए नहीं, साझा करने के लिए।

❤️ जो लोग सच में तुम्हारे हैं, उन्हें तुम्हें ढूँढ़ने का अवसर भी दो।

❤️ सम्मान माँगा नहीं जाता… जिया जाता है।

✨ One Line Takeaway

“सच्चे रिश्ते और सच्चे शब्द…शोर से नहीं, निमंत्रण से जन्म लेते हैं।”

💌❤️☕ Between Us – We Moments (Ep. 003)

(अचानक हल्की फुहार)(दोनों पार्क में चलते हुए बात कर रहे हैं। अचानक रिमझिम बारिश शुरू हो जाती है। अर्जुन तुरंत बैग से छोटा-सा फोल्डिंग छाता निकाल देता है।)

रिमी: 😲”अरे… ये छाता कब से साथ रखते हो?”

अर्जुन: ☂️😊”मौसम और ज़िंदगी… दोनों कब बदल जाएँ, पता नहीं चलता।”

रिमी: 🤭❤️”मतलब… मेरे लिए भी तैयारी रहती है?”

अर्जुन:”तैयारी मौसम की होती है…साथ तो तुम्हारा होता ही है।”

(दुपट्टा झाड़ी में अटक जाता है)

(चलते-चलते रिमी का दुपट्टा फूलों की झाड़ी में उलझ जाता है। वह घबराकर खींचने लगती है। अर्जुन मुस्कुराते हुए धीरे से छुड़ाता है।)

रिमी: 😅”रुको… मैं निकाल लेती हूँ।”

अर्जुन: 🌸”धीरे… कुछ चीज़ें ज़ोर लगाने से नहीं, धैर्य रखने से निकलती हैं।”

रिमी: 😊”ये बात दुपट्टे की है… या ज़िंदगी की?”

अर्जुन: ❤️”दोनों की।”

(बेंच पर बैठकर बारिश रुकने का इंतज़ार)

(दोनों एक ही छाते के नीचे बेंच पर बैठे हैं। सामने बारिश की बूंदें झील में गिर रही हैं।)

रिमी: 🌧️”जानते हो… पहले बारिश आते ही मैं भागने लगती थी।”

अर्जुन: ☕”और अब?”

रिमी: 😊”अब लगता है… कुछ बारिशें महसूस करने के लिए होती हैं।”अर्जुन: ❤️”बिल्कुल… हर मौसम से बचना ज़रूरी नहीं होता।”

(बारिश के बाद इंद्रधनुष)

(बारिश थम चुकी है। दूर हल्का इंद्रधनुष दिखाई देता है।)

रिमी: 🌈😍”देखो… इंद्रधनुष!”

अर्जुन: 😊”बारिश और धूप दोनों साथ हों… तब बनता है।”

रिमी: 🤔”मतलब… खुशियाँ भी?”

अर्जुन: ❤️”हाँ… सिर्फ आसान दिनों से नहीं बनतीं।”

(पार्क के गेट की ओर लौटते हुए)

(दोनों धीरे-धीरे बाहर की ओर चल रहे हैं। छाता बंद हो चुका है। रास्ते पर हल्की नमी है।)

रिमी: 🌸”आज का सबसे अच्छा हिस्सा पता है क्या था?”

अर्जुन: 😊”बारिश?”

रिमी: ❤️”नहीं… ये एहसास कि हर बार भीगने से डरना ज़रूरी नहीं।”

अर्जुन: ☕”और हर बार किसी के पीछे भागना भी नहीं।”

(दोनों मुस्कुराते हुए आगे बढ़ जाते हैं।)💕

रिमी:”अर्जुन…”

अर्जुन:”हूँ?”

रिमी: ❤️”अब समझ आया… Invitation ज़ोर से नहीं दिया जाता…”

अर्जुन: 😊”हाँ…

“दोनों साथ:”बस दिल खुला रखा जाता है।”

Between Us Ep. 002 “खुशियों की चाबी किसके हाथ में है?” 🔐

Between Us #001 | सबको इमरोज़ चाहिए… इमरोज़ बनना कौन चाहता है?

Ramandeep Kaur

Founder of Pearls of Words | Writer | Psychology • Spirituality • Life

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