Between Us #001 | सबको इमरोज़ चाहिए… इमरोज़ बनना कौन चाहता है?

🌿 Between Us — Episode 001
“हर कहानी बस एक ‘सुनो ना…’ से शुरू होती है।” 💙

सबको इमरोज़ चाहिए… इमरोज़ बनना कौन चाहता है?

सुबह की हल्की हवा चल रही थी।

मैं छत पर सब्ज़ियाँ काट रही थी।

रसोई का काम धीरे-धीरे शुरू हो चुका था।

नीचे पूरा घर अभी भी सो रहा था। शनिवार था, इसलिए किसी को जल्दी नहीं थी।मेरे मोबाइल पर एक स्टोरी सेशन चल रहा था।

लक्ष्य माहेश्वरी अमृता प्रीतम, साहिर लुधियानवी और इमरोज़ की कहानी सुना रहे थे।

मैं काम करती रही…और कहानी मेरे भीतर उतरती रही।थोड़ी देर बाद मैंने मोबाइल बंद किया।मन में कई सवाल थे।

मैं मुस्कुराई…और हमेशा की तरह कहा—”अर्जुन… सुनो ना…”अर्जुन रेलिंग के सहारे खड़ा था।एक हाथ में चाय का मग…दूसरे हाथ में अपना लैपटॉप।

उसने मुस्कुराकर पूछा—”आज क्या मिला कहानी में?”मैंने कहा—”एक बात दिल में अटक गई है।उन्होंने कहा…सबको इमरोज़ चाहिए…लेकिन इमरोज़ बनना कोई नहीं चाहता।

“कुछ पल दोनों चुप रहे।हवा थोड़ी और ठंडी हो गई।मैंने आगे कहा—”उन्होंने यह भी कहा…Love का opposite Hate नहीं…Ego हो सकता है।और कभी-कभी Indifference भी।

“अर्जुन ने धीरे से सिर हिलाया।फिर बोला—”मुझे लगता है…जब प्रेम होता है…तो हम दूसरे को देखना सीखते हैं।और जब अहंकार होता है…तो हमें सिर्फ़ अपना प्रतिबिंब दिखाई देता है।

“मैंने मुस्कुराकर पूछा—”तो क्या प्रेम केवल पाने का नाम है?”अर्जुन हँस पड़ा।

“नहीं…प्रेम शायद…किसी के जीवन में जगह बनाने का नाम है।बिना शोर किए…बिना हिसाब रखे…बिना हर पल बदले में कुछ माँगे।

“मैंने सब्ज़ी का आख़िरी टुकड़ा काटा।कटोरी उठाई।

और हँसते हुए बोली—”चलो…अब नीचे चलते हैं…नाश्ता भी बनाना है।”अर्जुन बोला—”और?

“मैंने आँख दबाकर कहा—”और वापस आते समय…गोलगप्पे भी खाने हैं।इतनी फिलॉसफी खाली पेट नहीं पचती।

“दोनों हँस पड़े।बात वहीं खत्म नहीं हुई…बस अगली सुबह तक के लिए रख दी गई।

🌿 Pearl of Words

हर किसी को इमरोज़ जैसा प्रेम चाहिए…लेकिन प्रेम पाने से पहले, प्रेम देने की कला सीखनी पड़ती है।प्रेम का सबसे सुंदर रूप वह नहीं जो सबसे ज़्यादा बोलता है…बल्कि वह है जो हर दिन, छोटे-छोटे कामों में चुपचाप साथ निभाता है।

✨ Between Us

“Some conversations don’t end… they simply wait for the next cup of tea.” ☕💙

🌼 Between Us Moments

☕ Between Us After the Conversation

(जब बातें खत्म नहीं होतीं… बस मुस्कुराहट में बदल जाती हैं।)🌿

अर्जुन चुपचाप रिमी के बाल क्लचर से बाँध देता है।

👩🏻 रिमी पीछे मुड़कर मुस्कुराती है— “थैंक यू… अब काम हो जाएगा।”

🧒🏻 अर्जुन हँसकर— “अब शिकायत मत करना कि बाल तंग कर रहे थे।” 😄

👩🏻 रिमी— “शिकायत बालों से नहीं थी… ध्यान खींचना था।” 🤭

🧒🏻 अर्जुन— “ओहो… तो यह पूरी साज़िश थी!” 😂

दोनों हँस पड़ते हैं…फिर… तुम अपने काम में लग जाती हो, मैं अपने काम में…लेकिन बातचीत चलती रहती है। 💙

🌿 Between Us Promise

बाल बाँध देना।

चाय पकड़ाना।

किताब का पन्ना मोड़कर रखना।

धूप ज़्यादा हो तो कुर्सी छाँव में खिसका देना।

गोलगप्पे का आख़िरी पीस दूसरे को दे देना।

यानी…Love is in the little things. 🤍

हर किसी की ज़िंदगी में ऐसे छोटे-छोटे पल होते हैं…

बस हर किसी को उन्हें देखने की आदत नहीं होती।.. 🌿

Ramandeep Kaur

Founder of Pearls of Words | Writer | Psychology • Spirituality • Life

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