MyPoems: Maa
मां रिश्तो के तो नाम कही है, पर मां होना आसान नहीं है अपना हर एक ख्वाब भुला कर, खुश रहना आसान नहीं है एक एक काम है मां के जिम्मे, समय सारणी सख्त बड़ी है हर पल काम में उलझे रहना, सज्जनों आसान नहीं है माना यह एहसान...
MyPoems: मेरा चांद
मेरा चांद अक्सर मेरी खिड़की से झांक कर, कुछ फुसफुसाता है मेरा चांद …. आधी अंधेरी रात से छुपता छुपाता, चांदनी मेरे मुख पर बिखर जाता है मेरा चांद…. मुझसे मेरी ही मुलाकात करा कर, अपने साथ खूब हंसता हंसाता है मेरा चांद…. मैं भी मायूसी में अमूमन मैं भी...
MyPoem: Sapne, The dreams of a woman
1. बीते कल के सपने मेरे वो सपने जुड़े थे तुमसे, तुम्हीं से मेरा ह्रदय जुड़ा था तुम्हें जो पाया मन उड़ चला था, तुम्हीं से मेरा हर आसरा था पर तुम्हें था प्यारा यह जहां सारा, ना मिल सका मुझे तुमसे सहारा मैं छुप गई फिर निज दाएरों...
MyPoems: ख्वाब
हमने बनाया था ख्वाबों का गुलिस्तां, जहाँ जस्बातों की सतह पर प्यार के गुल खिले थे अपनेपन और इज़्ज़त के दरख्तों पर सुकून के रसीले फल लदे थे महक रहा था गुलज़ार अरमानों का मोहबतों के झूले बंधे थे उन झूलों पर झूलती मैं उन झूलों पर झूलती मैं,...
MyPoems: घर की धूल
घर की धूल *चमकती धूप में जब कभी देखा अपनी हथेली को, कम नहीं पाया किसी से भी इन लकीरों को, *कुछ कमी तो रह गई फिर भी नसीब में मेरे, ठोकरें खाता रहा मन हर कदम तकदीर से! *हर सुबह लाती है मुझमें, इक नया सा हौंसला, हिम्मतें...
Poetess of the day
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MyPoems: मेरा अक्स
क्यूँ इतना मजबूर मेरा वजूद नज़र आता है ? उलझा उलझा बड़ा फ़िज़ूल नज़र आता है अपनी आँखों के बिखरते सपनों का क़तरा क़तरा ज़हर सा नज़र आता है हम ढूँढ़ते रहे जिन गलियों में खुद्की परछाई उन गलियों में अँधेरा ही नज़र आता है वो ख्वाहिशें जो उड़ती...
MyPoems: नारी शक्ति को दर्शाति कविता : तुम बिन
मैं जी नहीं पाऊँगी तुम बिन हाँ, जी नहीं पाऊँगी तुम बिन चाहे रिश्ते हजार मिल जाए पर साथ न कोई भी तुम बिन चाहे नाम अनेकों पड़ जाए, पहचान नहीं मेरी तुम बिन चाहे काम पहाड़ से बढ़ जाए पर शक्ति नहीं होती तुम बिन चाहे वक्त बहुत...
MyPoems : Social issues : सामाजिक पहलू
आरक्षण कोई मत बांटो इस देश को कोई मत बांटो मेरे देश को य यह भारत माता तड़प रही हम सब के आगे बिलख रही मत तोड़ो उस विश्वास को जो जोड़े आम और खास को अरे मत बांटो इस देश को तुम मत तोड़ो इस देश को यह आरक्षण...
My Blog : मेरे बचपन का सपना
इस दुनिया में हर कोई अपने सपनों के साथ जी रहा है। जैसे आत्मा के बिना शरीर का कोई मतलब नहीं वैसे ही सपनों के बिना अस्तित्व के कोई मायने नहीं। मेरे भी तो सपने हैं, वही जो बचपन से हमारे साथ साथ चलते आ रहे हैं, जिन्हें पूरा...