Poems

MyPoems: ऐ मालिक!

ऐ मालिक!

ज्यादा नहीं,

बस इतना करम करना

आँखों में शरम रखना

हाथों में धरम रखना

अपनी मर्यादाऔं का ज़हन में अदब रखना

ऐ मालिक!

ज्यादा नहीं,

बस इतना करम करना

बढ़ते कदमों को पिछले से बेहतर रखना

अच्छाई ना छूटे, ज़रा नज़र रखना

किरदार ऐसा देना कि,

पर्दा गिर भी जाए चाहे, पर ,

देर कर बजती रहें तालियाँ, इज्जत एसी बनाए रखना।।

ऐ मालिक!

ज्यादा नहीं,

बस इतना करम करना।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *